एक बात सोचो तुम्हारे शहर में कितने लोग रोज सुबह उठकर वहीं पुरानी नौकरी की तलाश करते हैं। कोई सरकारी जॉब का इंतजार करता है। कोई किसी बड़े शहर में जाकर कुछ बनने का सपना देखता है।
लेकिन क्या तुमने कभी सोचा है? तुम्हारे अपने शहर में ही ऐसे कई बिजनेस मौके पड़े हैं जिन्हें आज तक किसी ने पकड़ा ही नहीं। ज्यादातर लोग सोचते हैं छोटे शहर में बिजनेस के मौके नहीं होते। सारे मौके सिर्फ मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु में हैं। लेकिन सच यह है बड़े शहरों में कंपटीशन इतना है कि नया बिजनेस टिकना मुश्किल है। जबकि तुम्हारे छोटे शहर में आज भी ऐसी कई जरूरतें हैं जिन्हें कोई पूरा नहीं कर रहा।
आज मैं तुम्हें छह ऐसे बिजनेस बताऊंगा जो हर छोटे शहर में चल सकते हैं।
लेकिन आज भी कोई नहीं करता। ध्यान रखना। नंबर दो और नंबर पांच वो बिजनेस है जो सबसे ज्यादा अंडरएस्टीमेट किए जाते हैं। जबकि यही सबसे स्टेबल इनकम देते हैं। पहले यह समझो छोटे शहर में बिजनेस क्यों आसान है? बड़े शहर में हर आईडिया पर पहले से 10 लोग काम कर रहे हैं। लेकिन छोटे शहर में बेसिक जरूरतें भी अधूरी पड़ी हैं। जहां डिमांड है लेकिन सप्लाई नहीं वहीं असली मौका है। और जब कंपटीशन कम होता है तो एक अच्छी सर्विस देने वाला ही पूरे शहर का लीडर बन जाता है।
बिजनेस नंबर:-
एक प्रोफेशनल क्लीनिंग सर्विस। छोटे शहरों में आज भी लोग घर की सफाई खुद करते हैं या लोकल मेड पर निर्भर रहते हैं जो अक्सर समय पर नहीं आती। एक प्रॉपर ट्रेंड टीम के साथ डीप क्लीनिंग सर्विस शुरू करो। घर, ऑफिस, दुकानों के लिए। शुरुआत में इन्वेस्टमेंट, सिर्फ इक्विपमेंट और थोड़ी मार्केटिंग की चाहिए। एक बार भरोसा बन गया तो लोग बार-बार बुलाते हैं और रेफरल से ग्राहक अपने आप बढ़ते जाते हैं।
बिजनेस नंबर दो:-
और यह सबसे ज्यादा इग्नोर किया जाने वाला बिजनेस है। टिफिन और होम फूड डिलीवरी सर्विस। हर छोटे शहर में स्टूडेंट्स हैं जो कोचिंग के लिए बाहर से आए हैं। वर्किंग लोग हैं जिनके पास खाना बनाने का टाइम नहीं। एक क्वालिटी टिफिन सर्विस, घर जैसा खाना, टाइम पर डिलीवरी। यह बिजनेस बहुत कम इन्वेस्टमेंट में शुरू हो सकता है। और एक बार कस्टमर बेस बन जाए तो मंथली फिक्स्ड इनकम देता है बिना रुके।
बिजनेस नंबर तीन:-
कोचिंग सेंटर के लिए स्टेशनरी और प्रिंटिंग सर्विस। हर छोटे शहर में कोचिंग इंस्टट्यूट्स की भरमार है। लेकिन क्वालिटी प्रिंटिंग, फोटोकॉपी और स्टेशनरी सर्विस की कमी है। स्टूडेंट्स को रोज नोट्स प्रिंट करवाने होते हैं। टीचर्स को टेस्ट पेपर्स चाहिए होते हैं। एक अच्छी लोकेशन पर प्रिंटिंग शॉप, थोड़ी फास्ट सर्विस। यह बिजनेस रोज का स्टेडी कैश फ्लो देता है।
बिजनेस नंबर चार:-
सेकंड हैंड फर्नीचर और अप्लायंसेस का बिजनेस। छोटे शहरों में लोग नई चीजें खरीदने से पहले सोचते हैं। बजट टाइट होता है। पुराना फर्नीचर, पुराने अप्लायंसेस। कम कीमत में खरीद कर थोड़ा रिपेयर करके बेचना। यह बिजनेस बहुत कम इन्वेस्टमेंट में शुरू हो सकता है और मार्जिन भी अच्छा मिलता है क्योंकि डिमांड हमेशा रहती है। खासकर स्टूडेंट्स और नए किराएदारों में।
बिजनेस नंबर पांच:-
यह वो बिजनेस है जिसे लोग सबसे ज्यादा नजरअंदाज करते हैं। इवेंट डेकोरेशन और छोटी पार्टी प्लानिंग सर्विस। छोटे शहरों में शादियां, बर्थडे, छोटे फंक्शन हर हफ्ते होते हैं। लेकिन प्रोफेशनल डेकोरेशन सर्विस बहुत कम है। लोग या तो खुद करते हैं या बड़े शहर से महंगे वेंडर बुलाते हैं। एक लोकल डेकोरेशन बिजनेस बैलून डेकोर से लेकर बेसिक थीम पार्टीज तक कम इन्वेस्टमेंट में शुरू होकर धीरे-धीरे बड़ा हो सकता है।
बिजनेस नंबर छह:-
माइक्रो लॉजिस्टिक्स यानी लोकल कूरियर और डिलीवरी नेटवर्क, ऑनलाइन शॉपिंग। आज छोटे शहरों में भी उतनी ही बढ़ गई है। लेकिन बड़ी कंपनियों की डिलीवरी अक्सर लेट होती है। एक लोकल कूरियर सर्विस जो शहर के अंदर सामान तेज पहुंचाए। दुकानदारों के पैकेज से लेकर ऑनलाइन सेलर्स तक यह बिजनेस आज सबसे तेजी से ग्रो कर सकता है क्योंकि डिमांड रोज बढ़ रही है।
एक रियलिटी चेक और सुनो।
बहुत से लोग सोचते हैं छोटे शहर में पैसा नहीं है इसलिए बिजनेस नहीं चलेगा। लेकिन यह सोच गलत है। छोटे शहर में पैसा है बस वह बिखरा हुआ है। संगठित नहीं है। जो बिजनेस इस बिखरे हुए डिमांड को एक जगह इकट्ठा कर लेता है वही जीतता है। मान लो तुम्हारे शहर में 100 घर ऐसे हैं जिन्हें रोज टिफिन चाहिए। लेकिन आज तक किसी ने सबको मिलाकर एक सिस्टम नहीं बनाया जो पहले यह सिस्टम बना लेता है। पूरा मार्केट उसी का हो जाता है।
अब हर बिजनेस को थोड़ा और गहराई से समझते हैं।
क्लीनिंग सर्विस में असली मुनाफा तब आता है जब तुम एक बार का काम नहीं बल्कि मंथली कॉन्ट्रैक्ट लेते हो। ऑफिसेस और दुकानों के साथ। एक बार 10-15 मंथली क्लाइंट्स बन गए तो इनकम फिक्स्ड हो जाती है बिना रोज नए कस्टमर ढूंढे। टिफिन सर्विस में सबसे बड़ी ताकत है रिपीट कस्टमर। एक बार किसी को खाना पसंद आ गया, वह रोज आर्डर करता है महीनों तक।
यहां मार्केटिंग की जरूरत भी कम पड़ती है क्योंकि एक खुश कस्टमर अपने दोस्तों को खुद बता देता है। प्रिंटिंग और स्टेशनरी बिजनेस में सीजनल डिमांड का फायदा उठाना जरूरी है। एग्जाम टाइम में एडमिशन टाइम में डिमांड कई गुना बढ़ जाती है। जो दुकानदार इस टाइमिंग को समझकर पहले से तैयारी रखता है, वही सबसे ज्यादा कमाता है।
सेकंड हैंड फर्नीचर के बिजनेस में सबसे जरूरी है सही सोर्सिंग। जो लोग शहर छोड़कर जा रहे हैं, ट्रांसफर हो रहे हैं, वहां से सामान सस्ते में खरीदना और नए किराएदारों या स्टूडेंट्स को बेचना यह साइकिल हर शहर में लगातार चलता रहता है। इवेंट डेकोरेशन में शुरुआत छोटे बजट वाले फंक्शन से करना समझदारी है। जैसे बर्थडे और छोटे घरेलू फंक्शन। एक बार दो-तीन अच्छे इवेंट हो गए, फोटो सोशल मीडिया पर लग गई तो बड़े फंक्शन के आर्डर खुद आने लगते हैं।
लोकल कूरियर बिजनेस में सबसे बड़ा फायदा यह है कि तुम एक साथ कई दुकानदारों और ऑनलाइन सेलर्स के साथ पार्टनरशिप कर सकते हो। एक बार 5-10 रेगुलर बिजनेस पार्टनर बन गए तो रोज का डिलीवरी वॉल्यूम खुद बना रहता है। अब एक जरूरी बात समझो।
इन सभी छह बिजनेसेस में एक कॉमन चीज है। यह कोई नया इन्वेंशन नहीं है। यह कोई हाईटेक आईडिया नहीं है। यह सिर्फ वो बेसिक जरूरतें हैं जो तुम्हारे शहर में पहले से मौजूद हैं।
लेकिन कोई प्रॉपर्ली पूरा नहीं कर रहा। और यही असली मौका है। जो लोग यह समझ जाते हैं कि बड़ा आईडिया नहीं चाहिए। बस एक अधूरी जरूरत को अच्छे से पूरा करना है। वही अपने शहर में लीडर बन जाते हैं। एक सच और समझो। यह सारे बिजनेस ओवरनाइट सक्सेस नहीं देंगे। शुरुआत में मेहनत लगेगी, कस्टमर ढूंढने पड़ेंगे, भरोसा बनाना पड़ेगा। लेकिन जो लोग 3 से 6 महीने तक कंसिस्टेंटली काम करते हैं, वही असली रिजल्ट देखते हैं।
एक बार तुम्हारे शहर में तुम्हारी सर्विस का नाम बन गया, फिर कंपटीशन आना भी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि लोग एक बार भरोसे वाली सर्विस मिलने के बाद बदलना नहीं चाहते। तो शुरुआत कैसे करें? अपने शहर को ध्यान से देखो। वहां कौन सी जरूरत आज भी अधूरी है? कौन सी सर्विस लोग बार-बार मांगते हैं? लेकिन कोई ढंग से नहीं देता।
इन छह में से वह एक चुनो जो तुम्हारे रिसोर्सेज और स्किल से सबसे ज्यादा मैच करे। छोटी शुरुआत करो। एक-दो कस्टमर से शुरू करो। फीडबैक लो। धीरे-धीरे बढ़ाओ। याद रखना बड़ा बिजनेस बनने के लिए बड़े शहर की जरूरत नहीं होती। बड़ा बिजनेस बनता है। एक छोटी जरूरत को लगातार अच्छे से पूरा करने से। जो लोग यह समझ जाते हैं, वह अपने ही शहर में चुपचाप आगे निकल जाते हैं।